Monday, 11 July 2011

कहने को कुछ भी नहीं खास है !!

आज  फिर  ये  दिल  उदास  है , कहने  को  कुछ  भी  नहीं  खास  है ...

तेरी  यादों  का  झोंका  फिर  से  आया  है , आँखों  में  नमी  अपने  संग  लाया  है ..

दिल  के  अरमानो  को  कितना  भी  छुपाते  हैं , पर  ये  आँखों  के  रस्ते  बहार  आते  है ..

इजहारे  मोहब्बत  लफ़्ज़ों  से  नहीं  जताते  हैं , पर  ये  नयन  अपनी  भाषा में  कुछ  गुनगुनाते  हैं ..

आज  फिर  वो  याद  आया  तेरा  जुल्फों  का  सवारना, आँखों  का  झुकाना  और  दिल  में  सामा जाना ..

वो  तेरा  जाना , जाते  हुए  मुड कर  मुस्कुराना  और  नयनों  से  कुछ  कर  के  जाना ...

अब  तो  हम  रोने  से  भी  डरते  हैं , की  कहीं  तेरी  छवी  को  ये  आँसूं  आँखों  से  न  मिटा  दे ..

तेरी  जुदाई  का  प्याला  हम  रोज़  पीते  हैं , फिर  भी  मुस्कुरा  कर  हम  जीते  हैं ..

लो  फिर  हम  आज  चल  दिए  ले  के  ओठों  में  हंसी , आँखों  में  नमी  और  दिल  में  तेरा  नाम ...

फिर भी आज ये दिल क्यूँ  उदास  है  और  कहने  को  कुछ  भी  नहीं  खास  है ...

@मेरीतस्वीरकेरंग

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