Sunday, 15 April 2012

कहाँ आज हम पहुँच गये??

वक़्त  की  इन पथरीली  राहों  पर , चलते  हम  बिन  पँख परिंदे  से...
मन  की  अपनी  हर  मुराद  को , ढकते हम  दुनिया दारी के  पर्दों  से...

बचपन  की  हर  गलती  भली , समझदारी  की इन  हरकतों  से .
दोस्तों  के  संग  का  वो  दौर  भला , नादानी  की  झड़पों  में  खुशियाँ थी भरी...

कहाँ  गयी  वो  सारी बातें , करती  थी  जो  खुशियाँ  शामिल...
कुछ  पाने  की  इस  उलझन  में , भूल  गये  हम  हँसाने  को ...

जीने  की परिभाषा को , तौला हमने  दौलत  के  पलड़ों  पर ...
दोस्तों  की  सच्चाई  को , परखा  हमने  मतलब  के  चस्मो  से ...

माँ  के  आँचल की  छाँव से  , कहाँ  आज  हम  पहुँच  गये ???


@मेरीतस्वीरकेरंग

Monday, 19 March 2012

मेरी सारी दुनिया खुशियाँ तुझ से है.....

मेरी सारी दुनिया खुशियाँ तुझ से है..मेरी रोशन दुनिया तुझसे है....
          मेरे दिन रात अँधेरे बिन तेरे....मेरे जीवन का उजला तू है...
तू जब जब मुझसे रूठा है... मेरे हाँथ से जीवन छुटा है....
         तेरा साथ ही है जो मै जिन्दा हूँ... मेरा सारा जीवन ही तू है....


यह बेचैनी भी तुझ से है... तेरे दम से है करार मुझे...
         मेरी राहत भी... मेरी चाहत भी, मेरी हर एक धड़कन तू है...
तू शामिल है मेरी साँसों में... तू बसता है मेरी आँखों में....
        मेरा सपना भी तू, मेरा अपना भी तू... और जान भी मेरी तू है...


तुझ से हर उम्मीद मेरी... मेरी आस का दीपक तू है....
        मेरी साँस भी तू, मेरी आस भी तू... और मेरा मान भी तू है...

@मेरीतस्वीरकेरंग


Thursday, 23 February 2012

हम जो मुस्कुरा सकेंगे

हम  जो  मुस्कुरा  सकेंगे,  तो  क्या  अपने  गमो को  छिपा  सकेंगे ...
लब तो  खामोश  रह  जायेंगे,  पर  क्या  आँखें  भी  खामोश  रह  पायेंगी ...
तन्हाई  में  तो  अस्क छलक जाते  हैं,  पर  क्या  महफ़िल  में  उनको  रोक  पायेंगे ...
तुझमे  अपना  जहाँ  देखा  था  हमने,  पर  जहाँ  में  तुझको  देख  पायेंगे ...
हम  जो  मुस्कुरा  सकेंगे,  तो  क्या  अपने  गमो  को  भुला  सकेंगे ...
@मेरीतस्वीरकेरंग