हम जो मुस्कुरा सकेंगे, तो क्या अपने गमो को छिपा सकेंगे ...
लब तो खामोश रह जायेंगे, पर क्या आँखें भी खामोश रह पायेंगी ...
तन्हाई में तो अस्क छलक जाते हैं, पर क्या महफ़िल में उनको रोक पायेंगे ...
तुझमे अपना जहाँ देखा था हमने, पर जहाँ में तुझको देख पायेंगे ...
हम जो मुस्कुरा सकेंगे, तो क्या अपने गमो को भुला सकेंगे ...
@मेरीतस्वीरकेरंग
लब तो खामोश रह जायेंगे, पर क्या आँखें भी खामोश रह पायेंगी ...
तन्हाई में तो अस्क छलक जाते हैं, पर क्या महफ़िल में उनको रोक पायेंगे ...
तुझमे अपना जहाँ देखा था हमने, पर जहाँ में तुझको देख पायेंगे ...
हम जो मुस्कुरा सकेंगे, तो क्या अपने गमो को भुला सकेंगे ...
@मेरीतस्वीरकेरंग
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