Sunday, 9 October 2011

ज़िन्दगी गुनगुनाती है..

ज़िन्दगी गुनगुनाती है, कुछ तो सुनाती है....

गौर से सुना तो तेरे अक्स को ले कर कुछ कहानी बनाती है....


तेरी यादों को गुलदस्ते सा सजाती है,

दरवाजों को तेरी आहट की कहानी सुनाती है..

तेरी सांसों को मेरे जीने की निसानी बताती है,

तेरी बाँहों को मोतियों की माला सी सजाती है...

ज़िन्दगी गुनगुनाती है, कुछ तो सुनाती है......


तेरे चहरे से रोसन आशिय सूरज सा करती है,

तेरी आँखों में तस्वीर कल की दिखाती है...

तेरी बातों में पल पल की मुस्कराहट लाती है,

तेरे बालों में छावँ जन्नत की जताती है...

ज़िन्दगी गुनगुनाती है, कुछ तो सुनाती है......


तेरे ओठों को प्याला अमृत का बताती है,

तेरी पलकों को सहारा अड्चानो का जताती है..

जीवन की ज्योती को तेरे थिरकते पैरों सा जलाती है,

तेरी छुवन को खुसबू सा जीवन में फैलाती है...


ज़िन्दगी गुनगुनाती है, कुछ तो सुनाती है....

ज़िन्दगी गुनगुनाती है और तेरी ही कहानी सुनाती है....


@मेरीतस्वीरकेरंग