Thursday, 7 July 2011

दिल की कस्ती !!

तेरी  चाहत  की  उस  मस्ती  को , ले कर  बैठे  हम  दिल  की  कस्ती को ...
कहीं  धूप लगे  गम  की , तो  कहीं  छाँव   लगे  तेरे  मन  की ...
आती  जाती  इन  यादों  की  लहरों  में , खोजे  जन्नत  से  तेरे  चहरे  को ...
दिल  डूब  जाये  इन  लहरों  में , मिल  जाये  अगर  वो  मोती,  जिसमे  हो  तेरे  नयनों  की  ज्योती...
मिट  जाये  मेरे  दिल  की  ज्वाला , पा  कर  तेरे  ओठों  की  मधुशाला ..
उठती  है  गिरती  है  लड़  कर  तूफानों  से, मिट  कर  भी  ना  मिटती  है,  तेरी  यादों  की  वो  हस्ती  है ...
दिखती ओझल  होती , दूर  कहीं  से  मुझको  बुलाती,  तेरी  यादों  की  हर  काया ...
हम  तो  बैठे  उस  इंतेजार  में,  चांदनी  के  उस  प्यार  में .. दिल  की  कस्ती  को  जो  खीचे  तेरी  चाहत  के  ज्वार  में ..

@मेरीतस्वीरकेरंग 

2 comments:

  1. mere jine mai rakha kya hai...jo tu hai to bus sab mera hai ....wah mote wah...

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